देख ले बापू ग़ौर से
:- परमजीत सिहँ
देख ले बापू ग़ौर से,
क्या सुने है किसी और से ,
न , लक्ष्मी नहीं हूँ मैं ,
जो हर दिपावली पूजी जाऊँगी,
लोभ, प्रलोभ न बाँध तू मुझसे,
कि, धन की बरखा लाऊँगी,
भरम, लालच का यह पोटला,
बाँध तू किसी और से,
देख ले बापू ग़ौर से ।।१।।
देख ले बापू ग़ौर से,
क्या सुने है किसी और से ,
न , लक्ष्मी नहीं हूँ मैं ,
जो हर दिपावली पूजी जाऊँगी,
लोभ, प्रलोभ न बाँध तू मुझसे,
कि, धन की बरखा लाऊँगी,
भरम, लालच का यह पोटला,
बाँध तू किसी और से,
देख ले बापू ग़ौर से ।।१।।
चंडी,दुर्गा का न दे नाम मुझे,
जो महिषासुर से लड़ जाऊँगी,
आ रही हूँ मैं बेटी बनकर ,
बेटी का फ़र्ज़ निभाऊँगी,
नन्हें कदमों की आहट को,
तोड़ न जीवन डोर से ,
देख ले बापू ग़ौर से ।।२।।
जो महिषासुर से लड़ जाऊँगी,
आ रही हूँ मैं बेटी बनकर ,
बेटी का फ़र्ज़ निभाऊँगी,
नन्हें कदमों की आहट को,
तोड़ न जीवन डोर से ,
देख ले बापू ग़ौर से ।।२।।
धन पराया न मोहे जान तू,
तोहे बेटों से बड़ कर चाहूँगी,
पूत, कपूत हो सके हैं,
मैं अन्त तक साथ निभाऊँगी,
शिक्षा का कन्यादान दे मोहे तू ,
बचा इस अंधकार घनघोर से,
देख ले बापू ग़ौर से ।।३।।
तोहे बेटों से बड़ कर चाहूँगी,
पूत, कपूत हो सके हैं,
मैं अन्त तक साथ निभाऊँगी,
शिक्षा का कन्यादान दे मोहे तू ,
बचा इस अंधकार घनघोर से,
देख ले बापू ग़ौर से ।।३।।
जन्म भी जग का मो से ही है,
मारे भी जग मोको ही है,
ममता का वरदान भी मैं ही,
अभिशाप भी जाने मोको ही है,
बदल डाल दुनिया की रीति,
मैं, विनती करुँ हथ जोड़ के,
देख ले बापू ग़ौर से ।।४।।
मारे भी जग मोको ही है,
ममता का वरदान भी मैं ही,
अभिशाप भी जाने मोको ही है,
बदल डाल दुनिया की रीति,
मैं, विनती करुँ हथ जोड़ के,
देख ले बापू ग़ौर से ।।४।।
lovely poem i just loved your content please post more.
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