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Friday, August 9, 2013

मिलो सब से दिल खोल के !!
                                                                :-  परमजीत सिहँ
मिलो सब से दिल खोल के, 
विचारों को अपनें बहने दो,
कुछ अपनी तुम कहो,
कुछ औरों को कहने दो,
गुमसुम यूं न तुम बैठो,
गुफ़्तगू चलते रहने दो ।।१।।
किताबों में ज्ञान कहाँ रखा है,
जान लो उनसे जिन्होनें तजुर्बा चखा है,
कुछ सीखो, कुछ सिखाओ,
कुछ पूछो, कुछ बताओ,
बातें जो दिल में दबी है तेरे,
ज़बान से उसको कहने दो
मिलो सब से दिल खोल के, 
विचारों को अपने बहने दो ।।२।।
दुख का भार कह डालो, कहने से कम होता है,
सुख के पलों को बाँट लो, बाँटने से नहीं खोता है,
कुछ संभलो तुम, कुछ औरों को संभालो,
गले लगो, गले से लगा लो
जीवन के हर पल को,
ज़िन्दादिल रहने दो
मिलो सब से दिल खोल के, 
विचारों को अपने बहने दो ।।३।।
सूरज का ग़ुरूर देखो क्या देता पैग़ाम है,
सब कुछ एक सा नहीं रहता,कुछ देर में होनी शाम है,
कुछ समझो, कुछ समझाओ,
मान जाओ, या कुछ मनवाओ
प्यार से सब कुछ हल होता है,
यह मन्त्र जीवन संग रहने दो
मिलो सब से दिल खोल के, 
विचारों को अपने बहने दो ।।४।।

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