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Friday, August 9, 2013

अधिकार क्षेत्र यह किस का है
                                                          :-  परमजीत सिहँ
जल गयी वो, मर गयी वो.
उठा लो सामान यह जिसका है,
कोतवाल से पूछो जा कर,
अधिकार क्षेत्र यह किस का है ।।१।।

ख़ून से लथ पथ थी काया,
कोई क्यूँ न निकट आया,
चीत पुकार व्यर्थ हुई सब,
यहाँ कोई न इन्सान दिखता है,
कोतवाल से पूछो जा कर,
अधिकार क्षेत्र यह किस का है ।।२।।

क्यूँ मन्दिरों में है देवी की मूरत,
धुमिल है जब नारीत्व की सूरत ,
अग्नि  परिक्षा के बिना क्यूँ,
रघुवर का भरोसा नहीं टिकता है,
कोतवाल से पूछो जा कर,
अधिकार क्षेत्र यह किस का है ।।३।।

जिसके यहाँ लगी है आग,
रहेगा बस उसे ही याद,
भूलेगा शमशान, भूलेगा ज़हान
देखो ख़बरनामा यह कब तक बिकता है,
कोतवाल से पूछो जा कर,
अधिकार क्षेत्र यह किस का है ।।४।।

निर्भय तेरी यह कुर्बानी, यूँ ही व्यर्थ न जायेगी,
निर्भय होगा नारी जीवन,ऐसी सुबह फिर आयेगी
बदलनी होगी सोच समाज की,
जिसे नारी में बस जिस्म ही जिस्म दिखता है,
कोतवाल से पूछो जा कर,
अधिकार क्षेत्र यह किस का है ।।४।।

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