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Friday, August 9, 2013

सच है, मिटना मरना होगा !!!
                                                        :-  परमजीत सिहँ
माना सिंधु बहुत गहरा है,
यत्न स्वयं पर करना होगा,
मोती की जो चाह है मन में,
ढूब के पार उबरना होगा,
करना अगर कुछ हासिल जीवन में,
सच है, मिटना मरना होगा.
आसान राहें कब मन्ज़िल तक जाती है,
भेड़ बकरीयां ही झुण्ड  बनाती हैं,
मन्ज़िल की जो चाह है मन में,
सिहँ सा निडर विचरना होगा,
करना अगर कुछ हासिल जीवन में,
सच है मिटना मरना होगा.
क्यूँ सुनता औरों की बातें
भटके हैं, सबको भटकाते,
फ़ूलों की जो चाह है मन में,
पहले, काटों से दामन भरना होगा,
करना अगर कुछ हासिल जीवन में,
सच है मिटना मरना होगा.
नहीं करना है तो, हज़ार है कारण,
गिनते रहो, रहो साधारण
भय भरम सब छोड़ ऐ बन्धू
कर्म परायण बनना होगा,
करना अगर कुछ हासिल जीवन में,
सच है मिटना मरना होगा.
मुफ्त का करोबार कहाँ चलता है,
ज़ीवन बाज़ार, यहाँ सब मिलता है,
पर, जो ख़रीद की चाह है मन में,
फिर मोल अदा तो करना होगा,
करना अगर कुछ हासिल जीवन में,
सच है मिटना मरना होगा.

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